This party encourages us to create profound connections with our internal selves, which encourages spiritual progress and peace. This holy period reminds us which the Main of devotion could be the purity of our hearts and the sincerity of our prayers.
सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
इस तरह नवरात्रि के पूरे दिनों में मां की आराधना करें।
जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
लगा दें इसे, मिटेगा कष्ट-क्लेश, आएगी बरकत!
विश्वविद्यालय फर्जी मार्कशीट बांट रहा था.
गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें।
घट (कलश) स्थापना नवरात्रि पूजा का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह click here शुभता, ऊर्जा, और देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक है।
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
मंत्र साधना: साधक अपनी साधना के अनुसार गुरु से प्राप्त मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
गुप्त नवरात्रि पर्व के दिनों में सुबह जल्द उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
घट स्थापना करें: मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोएं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
पूजा आरंभ करें: दीपक जलाकर देवी का आवाहन करें।
मंत्र साधना के लिए एकांत और शांत स्थान चुनें।